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Sunday, 24 June 2012

जी चाहता है

कल तक जब हम नहीं जानते थे तो अच्छा था
आज जब जान गए हैं तो भूल जाने को जी चाहता है

कल नादाँ थे तो अच्छा था
आज समझ खोने को जी चाहता है

रोया तो बचपन में भी किया करते थे
आज न जाने क्यों फिर रोने को जी चाहता है


याद आती है वो सुबह जब बेफिक्र घूमा करते थे
 न कल की थी फ़िक्र  न आज की चिंता

कल जो गुजर गया वो चला गया
पर पता नहीं उससे आज मानने को जी चाहता है

जिंदगी तो पायी है हमने
अब जीवन पाने को जी चाहता है


वक़्त कहता है मै फिर  न  आऊंगा,
जीना  है   तो  इस  पल  को  जी  ले ,मैं  कल  तक  रुक  न  पाउँगा .





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