क्या पहेली है
कौन समझा है
पागल किया है कितनों को
कितनों ने है होश खोया
हक़ीक़त है
या कोई भयानक सपना
परयों की बात तो छोड़ो
कोई अपना नहीं लगता है अपना
तलाश है जिस चीज़ की वो है कहाँ
क्या है वो, शायद वो भी नहीं है पता
चलते चलते भूल गया हूँ जाना कहा है
बहुत समय से बस घूम रहा हूँ
कशमकश है ये कैसी,
कम्बख़्त ये क्या समय है.
लगता है सब कुछ तो पास है,
फिर भी मन ना जाने क्यों उदास है.
एक भीड़ सी है, इस दुनिया में
सब मग्न हैं अपनी धुन में
मैं भी इनमें से एक हूँ
खोया अपनी दुनिया में
काफ़ी सपने, ढेरों उम्मीदें
और बस एक मैं
काफ़ी अरमान, अनगिनत चाहतें
और कम समय
ठहरना मेरा काम नही
बस चले चला जा रहा हूँ
रास्ते जहा ले जायें इसकी ना फिकर हो
अपना रास्ता बना सकूँ तो मेहर हो
काफ़ी गम हैं
पर लाखों से कम हैं
खुशियाँ भी हैं
फिर भी आखें क्यूँ नम हैं
सब कुछ है अपनाया
हार नही है मानी
इसे मेरा स्वभाव कहो
या ये है रब की मेहरबानी
खुद कम चाहा है
दिया है ज़्यादा
प्यार बाँटा है
मिला है फिर भी आधा
जिस से भी मिला हूँ
खुशी है उसकी चाही
जीवन आख़िर एक कठिन सफ़र है
और हम सब हैं राही
कौन समझा है
पागल किया है कितनों को
कितनों ने है होश खोया
या कोई भयानक सपना
परयों की बात तो छोड़ो
कोई अपना नहीं लगता है अपना
तलाश है जिस चीज़ की वो है कहाँ
क्या है वो, शायद वो भी नहीं है पता
चलते चलते भूल गया हूँ जाना कहा है
बहुत समय से बस घूम रहा हूँ
कशमकश है ये कैसी,
कम्बख़्त ये क्या समय है.
लगता है सब कुछ तो पास है,
फिर भी मन ना जाने क्यों उदास है.
सब मग्न हैं अपनी धुन में
मैं भी इनमें से एक हूँ
खोया अपनी दुनिया में
काफ़ी सपने, ढेरों उम्मीदें
और बस एक मैं
काफ़ी अरमान, अनगिनत चाहतें
और कम समय
बस चले चला जा रहा हूँ
रास्ते जहा ले जायें इसकी ना फिकर हो
अपना रास्ता बना सकूँ तो मेहर हो
काफ़ी गम हैं
पर लाखों से कम हैं
खुशियाँ भी हैं
फिर भी आखें क्यूँ नम हैं
सब कुछ है अपनाया
हार नही है मानी
इसे मेरा स्वभाव कहो
या ये है रब की मेहरबानी
दिया है ज़्यादा
प्यार बाँटा है
मिला है फिर भी आधा
खुशी है उसकी चाही
जीवन आख़िर एक कठिन सफ़र है
और हम सब हैं राही

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